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ब्रेकिंग : धरसींवा मे 23 जून को इकठ्ठे होंगे प्रदेशभर के सभी छोटे बड़े पत्रकार

छत्तीसगढीया पत्रकार संघ के द्वारा पुलिस प्रशासन के खिलाफ उतरे विरोध में

तिल्दा नेवरा : छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में लगातार पत्रकारों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई, बदले की नीयत से किये जा रहे फर्जी FIR और प्रताड़ना के खिलाफ प्रदेशभर के पत्रकार संगठन सामूहिक रूप से लामबंद हो रहे हैं। जो कि अयसे ही मामले के चलते बस्तर में आंदोलन लगातार जारी है। वही बिलासपुर में भी पत्रकार साथियों ने एक दिवसीय प्रदर्शन कर आक्रोश जताया है।धरसींवा

बता दे कि रायपुर जिले के धरसींवा थाने में भी क्षेत्र के सक्रिय पत्रकार पर पुलिसिया कार्रवाई के प्रतिरोध में पत्रकारों का गुस्सा, एक दिवसीय प्रदर्शन के रूप में दिखने वाला है।
जिसमे छत्तीसगढ़ प्रदेश की एकमात्र क्षेत्रीय पंजीकृत पत्रकार संगठन छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ ने मोर्चा खोलते हुए। प्रदेशभर के स्थानीय और ग्रामीण स्तर पर पत्रकारिता करने वाले साथियों पर हो रहे कार्रवाई और जबरिया FIR के विरोध में बिगुल फूंक दिया है।

गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ की भाषाई अस्मिता और स्थानीयता के पक्षधर छत्तीसगढ़िया पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्ररथ गंधर्व ने प्रदेश भर के पत्रकारों से अपील करते हुए कहा है कि यह तमाम पत्रकारों की समस्या है। जो ग्रमीण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। राजनीतिक दबाव के चलते पत्रकारों पर सच दिखाने, व लिखने के एवज में उन पर झूठे मामलों में कार्रवाई कर दी जाती है। ऐसा ही मामला सिलयारी चौकी में हुआ। नाबालिग से गैंगरेप के मामले को चौकी प्रभारी और राजनीतिक रसूखदार आरोपियों के दबाव में मामला पंजीबद्ध नही किया जा रहा था। इस पर पत्रकारों ने पीड़ित परिवार के पक्ष में आवाज को ताकत देकर उठाया। जिसके चलते सिलयारी चौकी प्रभारी को सस्पेंड करना पडा। इतना ही नहीं उसके बाद उस मामले में FIR किया भी गया,य। वही इसके आरोपियों को पकड़ा भी गया।

ज्ञात हो कि उसके बाद पुलिस प्रशासन के द्वारा बदले की भावना से प्रभावित होकर हमारे जिस पत्रकार साथी ने मामला उठाया था। उसे भी आरोपियों के कहने मात्र से भयादोहन कर पैसे मांगने के आरोप में पुलिस ने आधी रात उसके घर से परिवार के बीच से किसी बड़े अपराधी की तरह उठा लिया गया। जिसमे तत्काल चालानी कार्रवाई कर दी और जेल भेज दिया गया ।जैसा कि षड्यंत्र पुर्वक फर्जी आरोप पत्रकार पर लगाया गया है। इस प्रकार तो कोई भी आरोपी किसी भी पत्रकार पर लेनदेन का आरोप लगाया जा सकता है । डिजिटल माध्यम से पैसे ट्रांसफर कर दे और फिर पुलिस उसे भी आरोपी बना कर जेल भेजा जा सकता है ?

अवगत हो कि वर्तमान में लोकतंत्र की आवाज बने पत्रकारों को आखिर पत्रकार सुरक्षा कानून के तहत क्यों सुरक्षा नही दिया जा रहा। अयसे ही बहुत से पत्रकारिता जगत के मुद्दों को लेकर प्रदेश के पत्रकार 23 जून को धरसींवा में सभा करेंगे और पैदल मार्च करके थाने में गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौपेंगे।इस विशाल सभा में शामिल होने और पत्रकार एकता की ताकत को दिखाने के लिए इस दिन प्रदेशभर के पत्रकार धरसींवा में इकठ्ठे होंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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