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संघर्ष, सेवा और राष्ट्रभक्ति की मिसाल थे स्वर्गीय पंडित मालूराम शर्मा : सौरभ जैन

आपात काल की याद आज भी परिवार में ताजा हो जाती है

तिल्दा-नेवरा : छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के क्षेत्र विकासखंड तिल्दा नेवरा के स्वर्गीय पंडित मालूराम शर्मा का जीवन सादगी, संघर्ष, राष्ट्रसेवा और सामाजिक समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक एवं राष्ट्रवादी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उक्त बात रायपुर जिला ग्रामीण अध्यक्ष सौरभ जैन लोकतंत्र प्रहरी छत्तीसगढ़ ने कहा बचपन से स्व मीसा बंदी मालूराम शर्मा जी स्व शांताराम जी से जुड़ कर सेवा कार्यों में अग्रणी रहा हुं, ओर नजदीक से उनको देखा हुं। तिल्दा-नेवरा

आगे सौरभ जैन ने बताया कि साधारण आर्थिक परिस्थितियों में जीवनयापन करते हुए पंडित मालूराम शर्मा एक छोटी चाय की दुकान संचालित करते थे। इसी दौरान उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ताओं और नेताओं से हुआ। राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर वे संघ एवं जनसंघ की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ गए। उनका मार्गदर्शन तत्कालीन प्रांत प्रचारक स्वर्गीय शांताराम जी सहित अनेक वरिष्ठ संघ नेताओं ने किया।
वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू होने के बाद लोकतंत्र समर्थक एवं राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं पर व्यापक कार्रवाई की गई। इसी क्रम में पंडित मालूराम शर्मा को भी मीसा (MISA) के तहत गिरफ्तार कर रायपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। लगभग दो वर्षों तक जेल में रहने के दौरान उनके परिवार को गंभीर आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनकी धर्मपत्नी और छोटे-छोटे बच्चों ने अत्यंत संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में जीवन व्यतीत किया, किंतु परिवार ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उसके बाद जेल से रिहा होने के बाद भी उन्होंने समाज और राष्ट्र की सेवा का कार्य निरंतर जारी रखा। वे पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे और युगधर्म समाचार पत्र से जुड़े रहे। सामाजिक जागरूकता, जनसमस्याओं और राष्ट्रहित के मुद्दों को सदैव प्रमुखता से उठाते रहे।

पंडित मालूराम शर्मा विश्व हिन्दू परिषद की गतिविधियों से भी जुड़े रहे तथा धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तिल्दा-नेवरा में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना के प्रयासों में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। इसके साथ ही परशुराम भवन निर्माण सहित अनेक सामाजिक एवं सांस्कृतिक परियोजनाओं में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई।
क्षेत्र में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं सामाजिक अभियानों में उनकी सक्रिय भागीदारी सदैव बनी रही। वे विभिन्न वर्गों के लोगों को साथ लेकर समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते थे। उनके सहज व्यवहार, सेवा भावना और संगठन क्षमता के कारण वे समाज के सभी वर्गों में सम्मानित थे।

स्वर्गीय पंडित मालूराम शर्मा का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा। आज भी उनके द्वारा किए गए कार्य और उनके आदर्श नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक विकास में उनके योगदान को सदैव सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद किया जाएगा।

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