ब्रेकिंग : तिल्दा साई धाम रोड निर्मित औद्योगिक परिसर दुकान के निर्माण एवं आवंटन पर उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

तिल्दा-नेवरा : छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के विकासखंड तिल्दा-नेवरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत तुलसी में साईं धाम रोड स्थित खसरा क्रमांक 469/1 पर इन दिनों निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। इस निर्माण के लिए ग्राम पंचायत में प्रस्ताव भी किया गया है। निर्माणाधीन स्थल को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि यहां औद्योगिक परिसर का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, पंचायत की जमीन पर इस प्रकार का निर्माण और भविष्य में परिसर के आवंटन को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।जबकि इसी खसरा नंबर पर विगत कुछ वर्ष पहले एक व्यक्ति के द्वारा दुकान का निर्माण करवाया जा रहा था उस निर्माण को शासन के द्वारा शासकीय जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए तोड़ दिया गया था।

ज्ञात हो कि जानकारों के अनुसार यदि उक्त भूमि ग्राम पंचायत की संपत्ति है और उस पर दुकानें अथवा औद्योगिक परिसर का निर्माण किया जा रहा है, तो निर्माण के बाद उसकी दुकानों या परिसरों का आवंटन मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 65 के अनुसार पंचायत में निहित या पंचायत की संपत्ति के विक्रय, पट्टा आदि के हस्तांतरण के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया तथा सक्षम स्वीकृति आवश्यक है।आखिर ग्राम पंचायत के पास ऐसा कौन सा कुबेर का खजाना है की इतना भारी औद्योगिक परिसर का निर्माण करवाया जा रहा है जबकि ग्राम पंचायत मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है
सार्वजनिक नीलामी का प्रावधान :
गौरतलब हो कि छत्तीसगढ़ पंचायत (अचल संपत्ति का अंतरण) नियम, 1994 के नियम 5 में प्रावधान है कि पंचायत की अचल संपत्ति का विक्रय अथवा पट्टा सामान्यतः सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से किया जाएगा। बिना सार्वजनिक नीलामी के हस्तांतरण तभी किया जा सकता है, जब उसके लिए राज्य शासन अथवा अधिकृत अधिकारी की पूर्व स्वीकृति हो और निर्धारित शर्तों का पालन किया गया हो।वहीं नियम 6 के अनुसार ग्राम पंचायत की अचल संपत्ति की नीलामी जनपद पंचायत के संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा कराई जाती है। नियम 8 में नीलामी की सूचना प्रकाशित करने की प्रक्रिया भी निर्धारित है।
केवल पंचायत प्रस्ताव से आवंटन पर सवाल :
बता दे कि ऐसे में यदि तुलसी पंचायत में बनने वाले औद्योगिक परिसर में दुकानें अथवा अन्य इकाइयां बनाई जा रही हैं, तो यह सवाल महत्वपूर्ण है कि इनका आवंटन किस प्रक्रिया से किया जाएगा? क्या इसके लिए सार्वजनिक नीलामी होगी? क्या ई-टेंडर या अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी? अथवा किसी व्यक्ति या संस्था को सीधे आवंटन किया जाएगा?छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भी पंचायत की दुकानों के मामले में यह स्पष्ट कर चुका है कि केवल ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पारित कर दुकान आवंटित करना पर्याप्त नहीं है और निर्धारित नीलामी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
सरपंच से जानकारी लेने के लिए संपर्क किया गया सरपंच के अनुसार
सरपंच के द्वारा कहा गया कि यह निर्माण ग्राम पंचायत के द्वारा करवाया जा रहा है जब उनसे पूछा गया कि औद्योगिक परिसर का वितरण किस आधार पर किया जाएगा तो उनका जवाब स्पष्ट नहीं आया और मैं अभी बाहर जा रहा हूं आने के बाद आप फोन कीजिए करके फोन काट दिया गयासरपंच द्वारा यदि इसे औद्योगिक परिसर बताया जा रहा है, तो पंचायत को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि भूमि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए स्वीकृत है, निर्माण की अनुमति किस विभाग से ली गई है, पंचायत का प्रस्ताव कब पारित हुआ, निर्माण के लिए राशि कहां से आई और निर्माण पूरा होने के बाद परिसर का आवंटन किस नियम के तहत किया जाएगा।
इसके अलावा यदि जमीन सरकारी अथवा पंचायत की संपत्ति है, तो उसके अचल संपत्ति रजिस्टर में दर्ज विवरण, भूमि का खसरा रिकॉर्ड, निर्माण स्वीकृति तथा सक्षम अधिकारी की अनुमति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उठ रहे हैं ये सवाल :
- खसरा क्रमांक 469/1 की जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम है?
- क्या जमीन ग्राम पंचायत में विधिवत निहित है?
- औद्योगिक परिसर निर्माण के लिए किस विभाग से अनुमति ली गई है?
– पंचायत की बैठक में इसका प्रस्ताव कब पारित हुआ?
- निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई और किस मद से खर्च हो रही है?
- निर्माण के बाद दुकानों अथवा औद्योगिक इकाइयों का आवंटन सार्वजनिक नीलामी से होगा या किसी अन्य प्रक्रिया से?
- यदि बिना नीलामी आवंटन किया जाना है तो क्या राज्य शासन अथवा अधिकृत अधिकारी की पूर्व स्वीकृति ली गई है?
- क्या इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी जमीन और पंचायत की संपत्ति से संबंधित सभी नियमों का पालन किया जा रहा है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि तुलसी ग्राम पंचायत इस निर्माण और प्रस्तावित आवंटन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करती है या नहीं, क्योंकि पंचायत की संपत्ति के उपयोग और हस्तांतरण में पारदर्शिता तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।



