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संकल्प साहित्य परिषद की पावस काव्य गोष्ठी में बही गीत, गजल और छंदों की सरिता

तिल्दा-नेवरा मे संकल्प साहित्य परिषद की एक दिवसीय मासिक काव्यगोष्ठी संपन्न

तिल्दा-नेवरा : छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के विकासखंड तिल्दा नेवरा मे साहित्य एवं मातृभाषा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से संकल्प साहित्य परिषद, तिल्दा-नेवरा की मासिक ‘पावस काव्य गोष्ठी’ का आयोजन छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रीय समाज छात्रावास में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता त्रिभाषी कवि एवं परिषद के अध्यक्ष श्री कृष्ण मुरारी वर्मा ने की।काव्य गोष्ठी

इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके पश्चात जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ किया। बारिश की रिमझिम फुहारों के बीच आयोजित इस साहित्यिक संध्या में गीत, गजल और छंदों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। वही इस गोष्ठी का संचालन संतोष नायक (सिनोधा) ने किया।

बता दे कि इस आयोजन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 20 साहित्यकारों ने सहभागिता की। प्रमुख रूप से जुगेश चंद्र दास, अध्यक्ष मधुकलश साहित्य परिषद कोसरंगी-खरोरा, टापलाल वर्मा, सचिव, यशवंत वर्मा, कोषाध्यक्ष तुलसी-नेवरा, मोहन लाल वर्मा, सह सचिव अल्दा, डॉ. सुभाष शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार तिल्दा, डॉ. इतवारी राम निषाद बेमता, डॉ. कृष्ण कुमार वर्मा, राष्ट्रीय कवि केसदा, चंद्रहास सेन, वरिष्ठ साहित्यकार कोसरंगी, नरेंद्र वर्मा ‘अरमान’ नवापारा, जागृति बघमार तिल्दा, अशोक दास, गजलकार कोसरंगी, गणेश राम वर्मा सिनोधा, उमाशंकर यदु युवा कवि नेवरा, जितेंद्र कन्नौजे बनसांकरा, तिलक राम ध्रुव झिरिया, अशोक धीवर ‘जलक्षत्री’ छंदकार तुलसी, तारन साहू नगपुरा-नेवरा एवं संजय साहू बेमता शामिल रहे।

ज्ञात हो कि साहित्यकारों ने पावस, देशभक्ति, छत्तीसगढ़ी अस्मिता, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल साहित्यिक रंग में सराबोर रहा। श्रोताओं ने गीत, गजल और छंदों का आनंद लेते हुए रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर परिषद के पदाधिकारियों ने सभी आगंतुक साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से आयोजित होने वाली ऐसी मासिक साहित्यिक गोष्ठियां साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और मातृभाषा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। तो वही संकल्प साहित्य परिषद की इस पहल को क्षेत्र के साहित्यप्रेमियों ने सराहनीय बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।

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