आज संतान की दीर्घायु व सुख शांति के लिए माताओ ने कमरछठ व्रत रख किये हलसष्ठी पूजा
गांव शहरो मे जगह जगह की गई हलसष्ठी पूजा महिलाओ ने संतानो की सुख समृद्धि की किये कामना

तिल्दा-नेवरा : छत्तीसगढ़ की पारंपरिक त्यौहार मे एक संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुखी एवं समृद्ध जीवन की कामना को लेकर महिलाओं ने बुधवार को कमरछठ यानी हलषष्ठी का व्रत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। जिसमे पुरे प्रदेश भर में नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक महिलाओं ने पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हलषष्ठी माता की पूजा-अर्चना कर अपनी संतान के मंगलमय जीवन की कामना की।
गौरतलब हो कि लगातार बारिश के बावजूद भी माताओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सभी गांवो व नगरो मे आस्था का जन सैलाब देखते ही बना। इस क्रम में आज अल्ट्राटेक सीमेंट बैकुंठ कालोनियों व कुंदरु, बहेसर व टंडवा मे भी यह पर्व बडे उल्लास के साथ मनाया गया। जहां हर चौक चौबारे, पारा मुहल्ले मे सगरी कुंड खोद कर वैदिक मंत्रों के जाप से यह पूजा किया गया।
ज्ञात हो कि तिल्दा नेवरा शहर के साथ अंचल के सासाहोली स्थित हृदय स्थल गांधी चौक में कमरछठ पर्व के लिए विशेष पूजा स्थल तैयार किया गया। यहां गांव के पुरोहितों के द्वारा व्रती महिलाओं को हलषष्ठी माता की व्रत कथा विस्तारपूर्वक सुनाई। जिसमे महिलाओं ने कथा का श्रवण करने के बाद विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना की और आरती उतारी।
इस अवसर पर पूजा स्थल पर पारंपरिक रूप से सगरी का निर्माण किया गया। सगरी के आसपास कांशी के फूल सजाए गए। इसके साथ ही मिट्टी से बनाए गए बैल, शिवलिंग तथा गौरी-गणेश की स्थापना कर पूजा की गई।जिसका व्रती महिलाओं ने हलषष्ठी माता का स्मरण करते हुए अपनी संतानों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी जीवन और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
ज्ञात हो कि आज इस पर्व के दौरान हुई बारिश भी महिलाओं की श्रद्धा को नहीं डिगा सकी। महिलाएं छाता लेकर पूजा स्थलों तक पहुंचीं और बारिश की फुहारों के बीच पूरे भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की। मौसम सुहाना होने के कारण पर्व का उत्साह ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखते ही बना। नगरो के अलावा आसपास के गांवों में भी महिलाओं ने समूह में एकत्र होकर पारंपरिक तरीके से कमरछठ पर्व मनाया।
गौरतलब हो कि कमरछठ पर्व के, बारे मे यह मान्यता बाताई जाती है कि इस दिन महिलाएं हल से जुते खेत में पैदा हुए अनाज का सेवन नहीं करतीं।वे सभी व्रत एवं पूजा के बाद महिलाओं ने पसहर चावल तथा छह प्रकार की भाजियों का प्रसाद ग्रहण किया। मान्यता के अनुसार हलषष्ठी माता की पूजा और व्रत करने से संतान पर माता का आशीर्वाद बना रहता है तथा उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।पूजा-अर्चना के उपरांत माताओं ने अपने-अपने बच्चों की पीठ पर पीली पोती लगाकर तिलक किया और उनकी दीर्घायु, सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। पूरे क्षेत्र में कमरछठ का पर्व पारंपरिक आस्था, श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया गया।



