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अध्यात्म में छुपा है सनातन संस्कृति का सार : ब्रह्माकुमार रामनाथ

ज्ञान ज्योति भवन तिल्दा में ‘सनातन संस्कृति का आधार : अध्यात्म’ विषय पर हुआ ज्ञानवर्धक कार्यक्रम

तिल्दा-नेवरा : धर्म एवं अध्यात्म प्रेमियों के लिए रविवार की शाम ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा सेवाकेंद्र ज्ञान ज्योति भवन में ‘सनातन संस्कृति का आधार : अध्यात्म’ विषय पर विशेष परिचर्चा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान से पधारे धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक आदरणीय ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई जी उपस्थित रहे। मंच पर तिल्दा गुरुद्वारा प्रमुख भ्राता मोहन, सिंधी समाज प्रमुख भ्राता चम्मनलाल, ब्रह्माकुमारीज़ के वरिष्ठ राजयोगी भ्राता जयेश एवं तिल्दा सेवाकेंद्र संचालिका बीके प्रियंका बहन उपस्थित रहीं।कार्यक्रम का शुभारंभ श्याम्भवी द्वारा गणेश वंदना पर सुंदर नृत्य प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात अंजू सोनी बहन एवं बिंदु वर्मा बहन ने समूह गीत प्रस्तुत कर अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया।

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ज्ञात हो कि मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार रामनाथ भाई जी ने सनातन शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि सनातन अर्थात जो कभी विनाश को प्राप्त न हो और सदा विद्यमान रहे। ऐसा केवल एक ही सत्ता है जो समय के साथ सदा सनातन रहता है वही सत्यम् शिवम् सुन्दरम् निराकार शिव . उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की मूल शिक्षा है कि हम आत्मा हैं और शरीर आत्मा का वस्त्र है। यही आध्यात्मिक ज्ञान गीता और रामायण में भी दिखाई देता है, जिसे उन्होंने विभिन्न उदाहरणों से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आत्मिक दृष्टि अपनाने से प्रेम, शांति, आनंद एवं शक्ति जैसे गुण जीवन में सहज रूप से विकसित होते हैं। उन्होंने तिल्दा वासियों से सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों को समझकर उन्हें जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

तिल्दा गुरुद्वारा प्रमुख भ्राता मोहन ने कहा कि गुरु-वाणी में भी आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व को बताया गया है। आध्यात्मिक ज्ञान से कुमति दूर होती है, संतुष्टि आती है तथा लोभ जैसे विकारों से मुक्ति मिलती है। समाजसेवी भ्राता हीरानंद हरिरामानी ने कविता के माध्यम से अध्यात्म का महत्व बताया। सिंधी समाज प्रमुख भ्राता चम्मनलाल ने रामनाथ भाई जी का आभार व्यक्त करते हुए पुनः तिल्दा पधारने का निमंत्रण दिया।

इस अवसर पर विभिन्न समाजों की ओर से रामनाथ भाई जी का सम्मान किया गया। सिख समाज के मोहन भाई ने शॉल भेंट कर सम्मान किया, वहीं सिंधी समाज के प्रबुद्धजनों ने रामनाथ भाई जी, जयेश भाई एवं बीके प्रियंका बहन का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान किया। जैन समाज की ओर से भ्राता सुदेश जैन, सौरभ जैन एवं पार्षद रानी जैन ने भी सम्मान किया। कार्यक्रम के अंत में बीके प्रियंका बहन ने राजयोग ध्यान के माध्यम से उपस्थितजनों को सनातन धर्म की आदि से वर्तमान तक की आध्यात्मिक यात्रा की सुखद अनुभूति कराई। राजयोग के पश्चात पूरा वातावरण शांत, सकारात्मक एवं श्रेष्ठ संस्कारों से ओतप्रोत दिखाई दिया।

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