
बस्तर के हुनर को मिला नया मंच, एनआईडी अहमदाबाद की टीम पहुंची नेतानार
मुख्यमंत्री श्री साय ने जताया गर्व छत्तीसगढ़ का नाम निरंतर बढरहा है
जगदलपुर, 28 मई (जयराम धीवर की रिपोर्ट) : छत्तीसगढ़ के बस्तर की ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक कौशल और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बुधवार को महत्वपूर्ण पहल की गई। अहमदाबाद के प्रतिष्ठित National Institute of Design (एनआईडी) के विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर जिले के नेतानार स्थित ‘शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ (सीआरपीएफ कैंप परिसर) का दौरा कर यहां संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया।

गौरतलब हो कि प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित सिलाई प्रशिक्षण केंद्र, ढेकी चावल यूनिट और इमली प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण करते हुए उनके कार्यों की सराहना की। इस दौरान जिला पंचायत के सीईओ प्रतीक जैन सहित वन, कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर सिलाई प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं ने बताया कि आसपास के 10 किलोमीटर क्षेत्र में कोई अन्य सिलाई केंद्र नहीं होने के कारण कपड़ों की अच्छी मांग है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं अपने घरों के पास बुटीक शुरू करने की योजना बना रही हैं। एनआईडी टीम ने महिलाओं को आधुनिक डिजाइन, उत्पाद गुणवत्ता और मार्केटिंग से जुड़े सुझाव दिए।
ज्ञात हो कि इसके बाद टीम ने पारंपरिक ढेकी चावल यूनिट का निरीक्षण किया। महिलाओं ने बताया कि वर्षों से बंद पड़ी इस पारंपरिक पद्धति को दोबारा शुरू कर स्थानीय उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
इमली प्रोसेसिंग यूनिट में मशीनों के माध्यम से इमली के बीज और रेशे अलग कर ‘इमली चपाती’ तैयार करने, उसकी ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग की प्रक्रिया भी टीम ने देखी। विशेषज्ञों ने इसे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी पहल बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने परिसर में संचालित सेवा केंद्र का भी अवलोकन किया। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग, बीमा और नागरिक सेवाओं का लाभ गांव के पास ही मिल रहा है। सप्ताह में तीन दिन संचालित होने वाले इस केंद्र से ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए दूर नानगुर नहीं जाना पड़ता, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।





