All India NewsChhattisgarh NewsInternational NewsLatest News

ब्रेकिंग : 12 फरवरी को देश व्यापी हडताल औद्योगिक श्रमिकों व संयुक्त राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रति न्यायिक टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन 

ट्रेड यूनियनों पर न्यायिक टिप्पणियाँ मजदूर विरोधी, संवैधानिक मूल्यों का अपमान : केंद्रीय ट्रेड यूनियन मंच

नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026 : देश के सक्रिय दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं स्वतंत्र सेक्टोरल फेडरेशनों/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की हालिया टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें मज़दूर विरोधी, तथ्यहीन और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध करार दिया है। मंच ने औद्योगिक ठहराव के लिए “आक्रामक ट्रेड यूनियनवाद” को जिम्मेदार ठहराने वाली टिप्पणियों को सिरे से खारिज किया है।इस अवसर पर संयुक्त बयान में कहा गया कि यह एक स्थापित तथ्य है कि काम के दिनों का नुकसान मजदूर आंदोलनों के कारण नहीं, बल्कि कॉरपोरेट कुप्रबंधन और अनियमितताओं के चलते होता है। न्यायालय की टिप्पणियाँ वर्गीय पूर्वाग्रह को दर्शाती हैं और संविधान में निहित सामाजिक न्याय, समानता तथा श्रम की गरिमा की भावना को कमजोर करती हैं।

घरेलू कामगारों के मुद्दे पर चिंता:

ज्ञात हो कि ट्रेड यूनियनों ने 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी की मांग को स्वीकार न किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। बयान में कहा गया कि देश का बड़ा कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है, जिसमें घरेलू कामगारों की संख्या बहुत अधिक है और इनमें अधिकांश महिलाएँ हैं। इसके बावजूद वे न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और श्रम संरक्षण से वंचित हैं तथा मजदूरी चोरी, अत्यधिक कार्य घंटे और मनमानी बर्खास्तगी जैसी समस्याओं का सामना कर रही हैं।

ILO कन्वेंशन का हवाला :

बता दे कि संयुक्त मंच ने याद दिलाया कि भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का संस्थापक सदस्य है और घरेलू काम को रोजगार के रूप में मान्यता देता है। भारत ILO कन्वेंशन 189 का हस्ताक्षरकर्ता है, जो घरेलू कामगारों के लिए सम्मानजनक मजदूरी और अधिकार सुनिश्चित करने की बात करता है। ट्रेड यूनियनों ने सरकार से इस कन्वेंशन की पुष्टि करने की मांग दोहराई।

है ट्रेड यूनियन लोकतंत्र की रीढ़ :

बयान में कहा गया कि ट्रेड यूनियनें कभी भी आर्थिक विकास में बाधा नहीं रही हैं। वे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत मान्यता प्राप्त लोकतांत्रिक संस्थाएँ हैं। नवउदारवादी नीतियाँ और कॉरपोरेट समर्थक फैसले ही औद्योगिक ठहराव के लिए जिम्मेदार हैं। ट्रेड यूनियनों का ऐतिहासिक योगदान स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान निर्माण तक रहा है।

12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल :

यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं, निजीकरण, एफडीआई विस्तार, मनरेगा को कमजोर करने जैसे कदमों के खिलाफ देशभर में असंतोष बढ़ रहा है। ट्रेड यूनियनों ने बताया कि 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल के माध्यम से मजदूर और किसान इन नीतियों के विरुद्ध अपना एकजुट विरोध दर्ज कराएंगे।संवैधानिक मूल्यों का अपमान

सुप्रीम कोर्ट से मांग :

गौरतलब हो कि केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट औद्योगिक ठहराव के लिए ट्रेड यूनियनों को दोषी ठहराने वाली टिप्पणियों को वापस ले और एक संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाए, जिसमें घरेलू कामगारों सहित सभी अनौपचारिक श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी और अधिकार सुनिश्चित किए जाएँ।

इस अवसर संयुक्त बयान पर इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी सहित अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनें और स्वतंत्र सेक्टोरल फेडरेशन/एसोसिएशन शामिल हैं।

cm24news

आप सभी का हमारे वेबसाइट पर हार्दिक स्वागत है आपको इस वेबसाइट पर छत्तीसगढ़ से जुड़े आवश्यक न्यूज़ एवं अपडेट देखने को मिलेंगे इस वेबसाइट में अलग-अलग वर्गों की रूचि का ख्याल रखते हुए हम खबरों का चयन करते हैं। समसामयिक खबरों के अलावे हम राजनीति, ब्यूरोक्रेसी, अपराध, बिजनेज, गैजेट, आध्यात्म, मनोरंजन, खेलकूद से जुड़ी खबरें आप तक पहुंचाते हैं। देश में कर्मचारी व शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग है, उनसे जुडी खबरों को भी हम प्रमुखता की श्रेणी में रखते हैं। युवाओं को रोजगार संबंधी सूचना तत्काल मिले, इसे लेकर भी हमने अपनी वेबसाइट में जॉब/शिक्षा का एक अलग कॉलम रखा है, ताकि युवाओं को रोजगार संबंधी सूचनाएं मिल सके। ~ CM24News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles