
आज तिल्दा नेवरा में मंत्री टंकराम वर्मा के उपस्थिति मे सात दिवसीय संगीतमय राम कथा का भव्य शुभारंभ
कलश यात्रा में हजारों की संख्या में लोग जुड़कर लगाये जयकारा राम नाम की
तिल्दा नेवरा :छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के क्षेत्र विकासखंड तिल्दा नेवरा मे स्वर्गीय सोमचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय राम कथा का शुभारंभ मांघी पूर्णिमा के पावन पर्व रविवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। नेवरा के बी.एन.बी. हाई स्कूल मैदान में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण व्याप्त रहा और राम नाम की गूंज सुनाई दी।
कलश यात्रा में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, श्रद्धालु, युवा एवं वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए।
सिर पर कलश धारण किए महिलाओं की कतारें :
जय श्रीराम के उद्घोष और भक्ति गीतों के साथ निकली यात्रा ने नगर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। यात्रा के पश्चात कथा स्थल पर विधिवत पूजन के साथ राम कथा आरंभ की गई।
यह संगीतमय राम कथा 1 फरवरी से 25 फरवरी तक आयोजित की जा रही है, जिसमें अयोध्या से पधारीं विदुषी कथा व्यास मानस मर्मज्ञ दीदी देवी श्री चंद्रकला अपने श्रीमुख से प्रतिदिन श्रोताओं को राम कथा का रसपान कराएंगी। कथा के प्रथम दिवस दीदी चंद्रकला ने श्रीरामचरितमानस की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। जिसमे दीदी ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि रामचरितमानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला दर्पण है, जो मनुष्य के अंतर्मन और चरित्र को शुद्ध करता है। उन्होंने रत्नावली से जुड़े उस प्रेरक प्रसंग का उल्लेख किया, जिसने तुलसीदास को सांसारिक मोह से निकालकर महाकवि बना दिया। दीदी ने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर झांकता है, तभी राम उसके जीवन में प्रकट होते हैं।
बता दे कि कथा के दौरान दीदी चंद्रकला ने एक सुंदर और भावप्रवण प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब जंगल में आग लगती है तो सभी जानवर जंगल से बाहर भागने लगते हैं, लेकिन गजराज हाथी जंगल से बाहर नहीं भागता। वह जंगल के भीतर स्थित सरोवर या नदी के पास जाकर ठहर जाता है, क्योंकि उसे ज्ञात होता है कि वह तेज नहीं भाग सकता। उसी प्रकार मनुष्य को भी यह समझना चाहिए कि हम भागकर कहां जाएंगे। भागने से समाधान नहीं मिलता, बल्कि प्रभु की शरण में जाने से ही कष्ट दूर होते हैं।
इस अवसर आगे उन्होंने कहा कि जो भक्त सच्ची भावना से प्रभु का नाम लेता है, चाहे वह कथा स्थल पर आए या घर में बैठकर भगवान को पुकारे, भगवान स्वयं उसके पास पहुंच जाते हैं। जैसे हाथी को विश्वास होता है कि सरोवर के पास रहने से आग उसे नहीं जला सकती, वैसे ही प्रभु स्मरण करने वाले भक्त पर संकट प्रभाव नहीं डाल पाते, बशर्ते उसकी भक्ति सच्ची हो।
इस दौरान दीदी चंद्रकला ने संगीतमय भजन “काम करते रहो, नाम जपते रहो, वक्त यूं ही जीवन का निकल जाएगा” प्रस्तुत किया, जिस पर श्रद्धालु तालियां बजाते हुए भावविभोर होकर झूम उठे। उन्होंने कहा कि प्रेम के तीन स्वरूप होते हैं—राम, अनुराग और वैराग्य। जो राम को पा लेता है, वह भवसागर से पार हो जाता है, जबकि अनुराग और वैराग्य में उलझा मनुष्य भटकता रहता है। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस ऐसा ग्रंथ है जिसमें जीवन का सम्पूर्ण सार समाहित है और इसके श्रवण के बिना कल्याण संभव नहीं।
अवगत हो कि इस अवसर पर भक्तों की भारी उपस्थिति और भक्तिमय वातावरण को देखकर दीदी चंद्रकला ने कहा कि तिल्दा नेवरा का यह मैदान आज साक्षात अयोध्या धाम जैसा प्रतीत हो रहा है। प्रथम दिवस की महाआरती में मंत्री टंक राम वर्मा सादगी के साथ शामिल हुए। आरती में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
मिली जानकारी के अनुसार आगामी छह दिनों की कथा में प्रभु श्रीराम की बाल लीला, राम जन्म उत्सव, धनुष यज्ञ सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। स्वर्गीय सोमचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन ने समस्त क्षेत्रवासियों से इस ‘ज्ञान गंगा’ में सपरिवार शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील कीये। 





