
दिल्लीराजहरा बालोद में गर्मी के कहर से रोज 400 से 500 चमगादड़ों की हो रही मौत बदबू से लोग परेशान
नौतपा की तेज गर्मी बनी जानलेवा, बीएसपी एमव्हीटी सेंटर के पास सैकड़ों मृत चमगादड़ों से बढ़ी चिंता
बालोद, 28 मई (जयराम धीवर की रिपोर्ट) : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के सबसे बड़े नगर पालिका क्षेत्र दल्लीराजहरा में नौतपा की भीषण गर्मी का असर अब वन्य जीवों पर भी दिखाई देने लगा है। बीएसपी एमव्हीटी सेंटर के पास लगे पेड़ों में रहने वाले सैकड़ों चमगादड़ों की रोजाना मौत हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर दिन करीब 400 से 500 चमगादड़ मर रहे हैं, जिससे इलाके में बदबू फैल गई है और लोगों का रहना मुश्किल हो गया है।

ज्ञात हो कि दल्लीराजहरा में इन दिनों तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। भीषण गर्मी से जहां लोग एसी और कूलर का सहारा ले रहे हैं, वहीं पेड़ों पर रहने वाले मूक जीव गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान की चपेट में आकर दम तोड़ रहे हैं। बीएसपी एमव्हीटी सेंटर के आसपास लगे पेड़ों के नीचे रोज बड़ी संख्या में मृत चमगादड़ देखे जा रहे हैं।
बता दे कि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका द्वारा मृत चमगादड़ों को हटाने के लिए कर्मचारियों को भेजा जा रहा है, लेकिन इतनी अधिक संख्या होने के कारण सभी मृत चमगादड़ों को हटाया नहीं जा पा रहा है। इससे आसपास के इलाके में तेज बदबू फैल रही है और राहगीरों सहित स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस बारे में लोगों ने आरोप लगाया कि समस्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बीएसपी प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वहीं पर्यावरण प्रेमियों ने भी इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है।पर्यावरण संरक्षणकर्ता वीरेंद्र सिंह ने कहा कि चमगादड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कीट नियंत्रण और परागण में मददगार होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में उनकी मौत पर्यावरण के लिए खतरे का संकेत है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ता तापमान और पेड़ों की कटाई वन्य जीवों के अस्तित्व के लिए बड़ा संकट बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वन्य जीवों और पक्षियों के संरक्षण के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में पर्यावरणीय असंतुलन और गंभीर हो सकता है।





