
छत्तीसगढ़ :जान कर चौक जायेंगे इस पुरानी व सुप्रसिद्ध गीत के शब्दार्थ
तिल्दा नेवरा :
छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति व परम्परा के अनुसार बहुत से लोक गीत कविता व चुटकुले, लोकोक्ति, व किस्से कहानियां सुनने पढने मे आशान सा जरूर लगता है। परंतु इसका शब्दिक अर्थ समझना व बताना हर किसी के बस में नहीं है। हमे भी इतने सालों बाद आज पता चला। यह रहस्य-निहित बाल-गीत का गूढ़ संदेश। जीसे आपको समाचार के माध्यम से अवगत करा रहे हैं।
गीत के बोल कुछ इस तरह से है :
“अटकन बटकन दही चटाकन,
लौहा लाटा बन के काटा।
तुहुर-तुहुर पानी गिरय,
सावन में करेला फुटय।
चल-चल बेटा गंगा जाबो,
गंगा ले गोदावरी जाबो।
आठ नगर पागा गुलाब सिंह राजा,
पाका-पाका बेल खाबो।
बेल के डारा टूटगे, भरे कटोरा फुटगे॥”
आपको बता दें कि इस अतिप्राचीन व लोकप्रिय इस बाल-गीत में अन्तर्निहित संदेश को जानने से आपको इसमे जीवन के उन लम्हों को दर्शाया गया है। जब हम इस संसार से बीदा लेने के समय में होते हैं। जाने क्या? है इसका शाब्दिक अर्थ :
1अटकन — जब शरीर जीर्ण हो जाता है और जीव उचित रूप से अन्न निगल नहीं पाता, तो वह अटकने लगता है।
2. बटकन — मृत्यु-समय निकट आने पर नेत्र-पुतलियाँ उलटने लगती हैं।
3. दही चटाकन — जब जीव देह-त्याग हेतु आतुर होता है, तब जन कहते हैं— “गंगाजल पिलाओ।”
4. लौहा लाटा बन के काटा — मृत्यु उपरान्त श्मशान ले जाकर लकड़ियों से दाह संस्कार करना, शीघ्रता से लकड़ी लाना।
5. तुहुर-तुहुर पानी गिरय — ज्वलन्त चिता के समीप खड़े जनों की आँखों से अश्रुधारा बहना।
6. सावन में करेला फुटय — अश्रुपूरित होकर कपाल क्रिया कर मस्तक को भेदन करना।
7. चल-चल बेटा गंगा जाबो — अस्थि-संचय कर विसर्जन हेतु गंगा ले जाना।
8. गंगा ले गोदावरी जाबो — अस्थि-विसर्जन कर तीर्थ-यात्रा सम्पन्न कर घर लौटना।
9. आठ नगर पागा गुलाब सिंह राजा — ग्रामान्तर से आये लोग पगड़ी बाँधते हैं और आशीर्वाद देते हैं कि अब आप ही गृह के मुखिया हैं।
10. पाका-पाका बेल खाबो — तेरहवीं अथवा दशगात्र के अवसर पर भोजन करना और कराना, तथा मृतक की संपत्ति उत्तराधिकार में पाना।
11. बेल के डारा टूटगे — परिवार का एक सदस्य घट जाना।
12. भरे कटोरा फुटगे — उस जीव का संसार से बन्धन टूटना, और भरा-पूरा परिवार बिखर जाना।

बता दे कि छत्तीसगढ़ के यह प्रतीकात्मक बाल-गीत वर्षों तक गूढ़ संदेश देता रहा। किन्तु इसके गहन अर्थ को समझने में लम्बा समय लग गया।





