आडानी पांवर के मजदूरों ने तिल्दा से रायपुर तक निकाली पैदल मार्च जनपद प्रकाश सागरवंशी के नेतृत्व में
अडानी पावर रायखेडा के श्रमिकों के वेतन भुगतान की मांग को लेकर जनपद सदस्य का आंदोलन
तिल्दा-नेवरा : छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के क्षेत्र विकासखंड तिल्दा नेवरा के समीपस्थ औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत संचालित अडानी पावर प्लांट रायखेडा में कार्यरत श्रमिकों के लंबित वेतन भुगतान को लेकर एक बार फिर विरोध तेज हो गया है। जनपद पंचायत तिल्दा के जनपद सदस्य प्रकाश सगरवंशी ने सोमवार सुबह 6 बजे अडानी पावर प्लांट रायखेडा के मुख्य गेट से पैदल मार्च प्रारंभ कर कलेक्ट्रेट रायपुर तक पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने शासन-प्रशासन पर श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने में लापरवाही का आरोप लगाया और श्रमिकों को उनका हक दिलाने की मांग की।
जनपद सदस्य प्रकाश सगरवंशी ने कहा कि जनपद क्षेत्र तिल्दा अंतर्गत आने वाले अनेक ग्राम पंचायतों के मजदूर अडानी पावर प्लांट रायखेडा में कार्यरत हैं। ये मजदूर लंबे समय से अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रमिक 8 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 तक हड़ताल पर बैठे थे। इस दौरान श्रमिकों की मांगों को लेकर श्रम विभाग, कलेक्टर कार्यालय, एसडीएम तिल्दा, अडानी पावर प्रबंधन एवं यूनियन पदाधिकारियों के बीच बैठक हुई थी।बैठक में हुए लिखित समझौते के अनुसार हड़ताल अवधि का वेतन श्रमिकों को दिए जाने पर सहमति बनी थी। बावजूद इसके, हड़ताल समाप्त हुए लगभग एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी श्रमिकों को उनका वेतन नहीं दिया गया है। इससे मजदूरों में भारी रोष और असंतोष व्याप्त है।
बता दे कि इस अवसर प्रकाश सागरवंशी ने कहा कि “जब प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के बीच श्रमिकों के पक्ष में समझौता हुआ था, तो उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा? यह सीधे-सीधे श्रम कानूनों का उल्लंघन है। गरीब मजदूरों को उनके मेहनत की कमाई से वंचित रखा जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही कलेक्टर एवं एसडीएम स्तर पर हस्तक्षेप कर श्रमिकों को हड़ताल अवधि का वेतन नहीं दिलाया गया, तो आने वाले दिनों में आसपास के जनप्रतिनिधि, ग्रामवासी और श्रमिक बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट रायपुर पहुंचकर उग्र प्रदर्शन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी। वही मार्च के दौरान मजदूरों और समर्थकों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बड़े औद्योगिक घराने श्रमिकों के श्रम पर मुनाफा तो कमा रहे हैं, लेकिन जब मजदूर अपने अधिकार की बात करते हैं तो उन्हें नजरअंदाज किया जाता है।
ज्ञात हो कि श्रमिकों ने यह भी बताया कि वेतन न मिलने के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इससे मजदूरों में गहरी नाराजगी है, जो किसी भी समय विकराल रूप ले सकती है।
अवगत हो कि फिलहाल कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासन की ओर से मामले पर परीक्षण कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और अडानी पावर प्लांट रायखेडा के श्रमिकों को उनका लंबित वेतन कब तक मिल पाता है।





