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ब्रेकिंग : अमित बघेल अजय यादव दिनेश वर्मा की फिर गिरफ्तारी कही आवाज को दबाने का राजनीतिक षड्यंत्र तो नही


रायपुर : छत्तीसगढ़ की जनता आज यह सवाल पूछ रही है कि आखिर लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना अपराध है या सत्ता के खिलाफ बोलना? एक तरफ सत्ता में बैठे नेता और मंत्री जनता की मेहनत की कमाई से आलीशान फॉर्च्यूनर गाड़ियों में घूम रहे हैं। उनके आगे पायलट गाड़ी और पीछे बॉडीगार्ड की गाड़ियां चलती हैं, लेकिन दूसरी तरफ जो लोग जनता के अधिकार, न्याय और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके पीछे पुलिस की गाड़ियां लगाई जा रही हैं। यह लोकतंत्र नहीं बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र का स्पष्ट उदाहरण है।

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गौरतलब हो कि जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने आरोप लगाया है कि अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत गिरफ्तार किया गया है। सरकार चुनाव तक उन्हें जेल में बंद रखकर जनआंदोलन की आवाज को कमजोर करना चाहती है। वही पार्टी ने कहा कि अमित बघेल और अजय यादव के खिलाफ दर्ज सभी मामले पिछले 11 वर्षों में हुए विभिन्न जनआंदोलनों से जुड़े हुए हैं। उनके ऊपर कोई चोरी, डकैती, जालसाजी या व्यक्तिगत लाभ के अपराध दर्ज नहीं हैं। उन्होंने हमेशा जनता, किसानों, युवाओं और छत्तीसगढ़ के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है।


बता दे कि 10 जून 2024 की घटना के लगभग 19 महीने बाद अचानक अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा की गिरफ्तारी की गई। जबकि सभी मामलों में पुलिस पहले ही चालान पेश कर चुकी थी और न्यायालय में ट्रायल चल रहा था। ऐसे समय में गिरफ्तारी होना यह साबित करता है कि कार्रवाई कानून के आधार पर नहीं बल्कि सरकार के इशारे पर की गई है।जिसमे पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि केवल पुलिस अधिकारियों के बयान के आधार पर एक ही घटना को अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत करते हुए चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। यह न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग है।


ज्ञात हो कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस प्रशासन आज तक ऐसा कोई फोटो या वीडियो प्रस्तुत नहीं कर पाया है। जिसमें अमित बघेल या अजय यादव किसी मंच से भाषण देते हुए। कलेक्टर परिसर में उपस्थित रहते हुए या किसी घटना का नेतृत्व करते हुए दिखाई दें। इसके बावजूद उन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया जा रहा है। यदि ऐसा कोई भाषण हुआ है। तो पुलिस उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करती? इससे साफ है कि आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं।


इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा कुल 13 मामले दर्ज किए गए और लगभग 198 लोगों को आरोपी बनाया गया था। उन सभी को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, लेकिन अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा को जमानत नहीं मिलना कई सवाल खड़े करता है। क्या सरकार विशेष रूप से इन्हें निशाना बना रही है?


पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने स्वयं इस घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है, लेकिन आज तक वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। यदि सरकार पारदर्शी है तो रिपोर्ट जनता के सामने क्यों नहीं लाई जा रही?


सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है कि जोड़ा जैतखाम को काटने वाला वास्तविक दोषी कौन है? सरकार और पुलिस प्रशासन को इसका जवाब जनता के सामने रखना चाहिए।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने कहा कि यह लड़ाई केवल तीन व्यक्तियों की नहीं है, बल्कि न्याय, सत्य और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार अपनी राजनीतिक नाकामी और कमजोरी को छिपाने के लिए दमनकारी कार्रवाई कर रही है।
पार्टी ने स्पष्ट कहा कि संघर्ष जारी रहेगा और न्याय मिलने तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
“हम न्याय, सत्य और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहेंगे।”

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