
सरसीवां शहर से ही फोर लेन बनाने से जनता का विरोध कर रहे बायपास की मांग
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 1 अगस्त 2025 :
छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार के समीपस्थ राष्ट्रीय राजमार्ग 130-B के अंतर्गत कुम्हारी से सारंगढ़ तक प्रस्तावित फोर-लेन सड़क परियोजना को लेकर सरसीवा नगर पंचायत में जनविरोध तीव्र होता जा रहा है। प्रस्तावित मार्ग यदि नगर के मध्य से गुजारा गया। तो सैकड़ों परिवारों को विस्थापन और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसी आशंका के चलते स्थानीय नागरिकों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और वैकल्पिक बायपास मार्ग की मांग कीये है ।
बता दे कि इस संबंध में यहां के नागरिकों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क मार्ग नगर के अत्यंत व्यस्त और घनी आबादी वाले हिस्से से होकर गुजरता है। जहां दोनों ओर लगभग 150 आवासीय मकान और 150 से अधिक व्यवसायिक प्रतिष्ठान दशकों से स्थापित हैं। यदि सड़क इसी मार्ग से निर्मित होती है। तो न केवल लोगों को अपने घरों और दुकानों से बेदखल होना पड़ेगा। बल्कि उनका संपूर्ण आजीविका तंत्र भी तहस-नहस हो जाएगा।जो कि यहा की जनता को कदापी गवारा नहीं है।
ज्ञात हो कि व्यापारियों, रहवासियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एक स्वर में प्रशासन से अपील की है कि सड़क का निर्माण नगर की सीमाओं के बाहर से बायपास के रूप में किया जाए। ताकि विकास के साथ-साथ जनजीवन भी सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। परंतु जनविरोध की उपेक्षा करके लागू की गई कोई भी योजना दीर्घकालिक सामाजिक असंतोष को जन्म दे सकती है। वही स्थानीय लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि परियोजना से पहले न तो कोई जनसुनवाई की गई, न ही किसी प्रकार का सामाजिक या पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन किया गया है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि योजना को जल्दबाज़ी और एकतरफा तरीके से लागू किया जा रहा है। जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के विपरीत है। नगरवासियों ने चेतावनी दी है किसरसीवां शहर से ही फोर लेन बनाने से जनता का विरोध कर रहे बायपास की मांग
शहर के बीचो बीच फोर-लेन सड़क के निर्माण से उजडेगे की मकान व दुकान हो रहा विरोध
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 1 अगस्त 2025 : छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार के समीपस्थ राष्ट्रीय राजमार्ग 130-B के अंतर्गत कुम्हारी से सारंगढ़ तक प्रस्तावित फोर-लेन सड़क परियोजना को लेकर सरसीवा नगर पंचायत में जनविरोध तीव्र होता जा रहा है। प्रस्तावित मार्ग यदि नगर के मध्य से गुजारा गया। तो सैकड़ों परिवारों को विस्थापन और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसी आशंका के चलते स्थानीय नागरिकों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और वैकल्पिक बायपास मार्ग की मांग कीये है ।
बता दे कि इस संबंध में यहां के नागरिकों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क मार्ग नगर के अत्यंत व्यस्त और घनी आबादी वाले हिस्से से होकर गुजरता है। जहां दोनों ओर लगभग 150 आवासीय मकान और 150 से अधिक व्यवसायिक प्रतिष्ठान दशकों से स्थापित हैं। यदि सड़क इसी मार्ग से निर्मित होती है। तो न केवल लोगों को अपने घरों और दुकानों से बेदखल होना पड़ेगा। बल्कि उनका संपूर्ण आजीविका तंत्र भी तहस-नहस हो जाएगा।जो कि यहा की जनता को कदापी गवारा नहीं है।
ज्ञात हो कि व्यापारियों, रहवासियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एक स्वर में प्रशासन से अपील की है कि सड़क का निर्माण नगर की सीमाओं के बाहर से बायपास के रूप में किया जाए। ताकि विकास के साथ-साथ जनजीवन भी सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। परंतु जनविरोध की उपेक्षा करके लागू की गई कोई भी योजना दीर्घकालिक सामाजिक असंतोष को जन्म दे सकती है।
वही स्थानीय लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि परियोजना से पहले न तो कोई जनसुनवाई की गई, न ही किसी प्रकार का सामाजिक या पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन किया गया है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि योजना को जल्दबाज़ी और एकतरफा तरीके से लागू किया जा रहा है। जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के विपरीत है। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन, नगर बंद, धरना और प्रदर्शन जैसे लोकतांत्रिक उपायों को अपनाने के लिए बाध्य होंगे। 
इतना कुछ होने के बाद भी फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, किंतु जनता की एकजुटता और आंदोलन की आहट ने ज़रूर प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।जो की यदि इस पर विचार गंभीरता पूर्वक नही किया जाये तो मामला और भी गंभीर हो सकता है। यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन, नगर बंद, धरना और प्रदर्शन जैसे लोकतांत्रिक उपायों को अपनाने के लिए बाध्य होंगे।





