इस दिवाली गौ माता के गोबर से निर्मित आकर्षक बहुउपयोगी पर्यावरण अनुकूल दीये अपनाये
गाय के गोबर से परंपरा, आस्था और प्रकृति के संगम का अनोखा उदाहरण गोबर के दिये
रायगढ़ : इस वर्ष दीपोत्सव का पर्व नजदीक है। और इस बार शहर में एक अनोखी पहल लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ये गौ माता के गोबर और शुद्ध मिट्टी से निर्मित पारंपरिक दीये हैं।
बता दे कि गौ माता का गोबर सदियों से पवित्रता, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता रहा है। इन्हीं गुणों से प्रेरित होकर स्थानीय कारीगरों ने गोबर और मिट्टी के मिश्रण से ऐसे दीये तैयार किए हैं। जो पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल हैं। इन दीयों को जलाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जिससे घर का माहौल शांत, शुभ और समृद्धिमय बनता है। पूजा स्थल में रखे जाने पर ये दीये नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर स्थान को शुद्ध व पवित्र करते हैं। दीपक जलाने का यह पारंपरिक रूप न केवल आस्था का प्रतीक है। बल्कि यह स्वदेशी और सतत जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है। मिट्टी और गोबर से बने ये दीये प्लास्टिक और रासायनिक उत्पादों का एक श्रेष्ठ विकल्प बनकर सामने आए हैं।
जाने कहां मिलेंगे ये विशेष दीये ?
यदि आप रायगढ़ और आस-पास के क्षेत्रों में हैं। तो ये दीये ढिमरापुर कुम्हार पारा, होटल अंश के सामने उपलब्ध हैं।
स्थान: ढिमरापुर कुम्हार पारा, होटल अंश के सामने, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) ।या फिर हर शहर कस्बे के बाजारो मे आशानी ले लिया जा सकता है।
देश प्रदेशवासियों आइए इस दीपावली, अपनाए स्वदेशी परंपरा जलाइए गौ माता के आशीर्वाद से बने पवित्र दीये और रोशन कीजिए घर, मन और वातावरण। विदेशी व चाईना के लोभ लुभावने चीजो को त्याग कर स्वदेशी व पारंपरिक चीजो को महत्व देते हुए अपनाये।





