तिल्दा के ग्रेविटी आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ लगे प्रदूषण के आरोप
प्रदूषण से हो रही फसल बर्बाद बिमारी से ग्रसित हो रहे क्षेत्रवासी
तिल्दा -नेवरा :
छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के क्षेत्र विकासखंड तिल्दा नेवरा के समीपस्थ औद्योगिक क्षेत्र में स्थित ग्रेविटी आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ प्रदूषण के आरोपों लगाये गये हैं। जिसकी जांच शुरू होनी चाहिये । इस कंपनी के खिलाफ आसपास ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी से निकलने वाले प्रदूषण के कारण उन्हें सांस लेने में तकलीफ, त्वचा संबंधी रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
हो रही भारी प्रदूषण के दुष्प्रभाव :
बता दे कि यहां के ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के कारण उनके खेत, घर और पानी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण उन्हें स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय रहते कंपनी के द्वारा प्रदूषण पर नियंत्रण नही किया गया। तो आसपास के ग्रामीणों के द्वारा कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं और सरकार से कार्रवाई करने की मांग कर सकते है।
विभागीय प्रशासन के द्वारा उचित कार्रवाई की मांग :
ज्ञात हो कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस मामले में जांच शुरू कर देना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी इस मामले में सक्रिय भूमिका होना चाहिए। वही प्रदूषण के स्तर की जांच करना चाहिए। अगर कंपनी दोषी पाई जाती है। तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी ।
क्षेत्र में प्रदूषण अनियंत्रण में क्या प्रशासन शामिल है?
गौरतलब हो कि इस मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रशासन को प्रदूषण के स्तर की जांच करनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। अगर कंपनी दोषी पाई जाती है। तो प्रशासन को उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। प्रशासन की भूमिका निभाने में कमी नहीं होनी चाहिए।
ग्रेविटी आयरन एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ प्रदूषण के आरोपों की जांच करना आवश्यक है। सरकार, स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिलकर इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। हमें उम्मीद है कि सरकार इस मामले में कड़े कदम उठाएगी और ग्रामीणों को न्याय दिलाएगी।

आगे की कार्रवाई
अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। ग्रामीणों को न्याय दिलाने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे। हमें उम्मीद है कि सरकार इस मामले में जल्द ही कार्रवाई करेगी और ग्रामीणों को राहत प्रदान करेगी।





