
जाने 15 साल पुरानी दुपहिया चार पहिया के लिए री-रजिस्ट्रेशन की क्या प्रक्रिया है
किसी भी वाहनों की एक सिमित वैध समय सीमा निर्धारित होता है जो RTO तय कर्ता है
रायपुर : किसी भी वाहनों की एक निश्चित समय सीमा के बाद पुन: रजिस्ट्रेशन (Re-registration) करवाना जरूरी होता है। ताकि आप उसे कानूनी रूप से चला सकें। जिसकी इसका पूरा विवरण इस प्रकार है।
1.) कब करनी होती है रिन्यूअल (Re-registration)?
पेट्रोल कार की रजिस्ट्रेशन वैलिडिटी 15 साल होती है।
15 साल पूरे होने के बाद, आपको RTO में Re-registration करानी पड़ती है।
इसके बाद कार की वैलिडिटी हर 5 साल के लिए बढ़ाई जाती है।
2.) जरूरी डॉक्युमेंट्स
1. RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट)
2. इंश्योरेंस की कॉपी
3. PUC (Pollution Certificate)
4. मालिक का Aadhaar या ID प्रूफ
5. फॉर्म 25 (Re-registration के लिए RTO में भरना होता है)
6. गाड़ी की फोटो और गाड़ी को इंस्पेक्शन के लिए RTO ले जाना होता है।
3.) खर्चा (Approximate Fees)
राज्यो के हिसाब से थोड़ा फर्क होता है। पर सामान्य रूप से
खर्च का नाम अनुमानित राशि
फिटनेस टेस्ट फीस ₹600 – ₹1,000
रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस ₹600 – ₹1,000
ग्रीन टैक्स (कुछ राज्यों में) ₹3,000 – ₹5,000 (या ज्यादा)
एजेंट / सर्विस चार्ज (अगर लेते हैं) ₹1,000 – ₹2,000 (वैकल्पिक)
। कुल मिलाकर लगभग ₹4,000 से ₹7,000 तक खर्च आता है।
4.) Re-registration के बाद वैलिडिटी
एक बार RTO से रिन्यू करवाने के बाद आपकी कार की RC फिर से 5 साल के लिए वैलिड हो जाती है।
उसके बाद हर 5 साल में दोबारा फिटनेस टेस्ट और रिन्यूअल कराना पड़ता है।
5.) अगर Re-registration नहीं कराई तो
पुलिस चेकिंग में कार सीज या चालान हो सकती है।
इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी एक्सीडेंट क्लेम नहीं देती। अगर RC वैध नहीं है। अगर आप RTO आफिस में जाकर यदि यह बताएँ कि आप किस राज्य या शहर में हैं। तो वहां बैठे अधिकृत कर्मचारियों के द्वारा आपके RTO के हिसाब से सटीक फीस और प्रक्रिया बता देगा।
यदि और भी अधिक जानकारी चाहिए तो संबंधित प्रदेश, जिले के RTO विभाग के कार्यालय या विभाग के वेबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर सकते हैं। बता दे कि पहले की आपेक्षा सरलीकरण कर दिया गया है।





