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भीषण ठंड में ‘साइलेंट किलर’ बन रहा है हार्ट अटैक: डां महेश चन्द्र प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ

सोते समय बरती गई एक छोटी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

​नई दिल्ली :

वर्तमान समय में
उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। इस मौसम में न केवल सर्दी-जुकाम, बल्कि हृदय रोग (Heart Disease) के मामलों में भी अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। विशेषकर 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ के मामले बढ़ रहे हैं।

गौरतलब हो कि हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, रात में सोते समय अचानक उठना जानलेवा साबित हो सकता है।
​क्यों बढ़ जाता है सर्दियों में खतरा?
​प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश चन्द्र के अनुसार, “भीषण ठंड के कारण हमारे शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त (Blood) गाढ़ा होने लगता है। जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो शरीर की क्रियाएं धीमी होती हैं। ऐसे में यदि हम अचानक बिस्तर से उठते हैं, तो रक्त का प्रवाह पूरी तरह से हृदय और मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता। यह स्थिति हृदय गति रुकने (Heart Failure) का प्रमुख कारण बनती है।”

जाने ये ​साढ़े 3 मिनट का जादुई फार्मूला बचा सकता है आपकी जान

बता दे कि ​जनरल फिजिशियन डॉ. एस.के. अग्रवाल ने इस समस्या से बचने के लिए ‘साढ़े तीन मिनट’ का एक बेहद सरल और प्रभावी उपाय बताया है। अक्सर लोग रात में मूत्र विसर्जन (पेशाब) के लिए अचानक उठकर चलने लगते हैं, जिससे ईसीजी (ECG) पैटर्न बदल सकता है और मस्तिष्क में रक्त की कमी (Anemia of Brain) हो सकती है।

इस ठंडी के समय में ​इन 3 चरणों का पालन करें

ज्ञात हो कि ​प्रथम आधा मिनट: नींद खुलने के बाद एकदम से न उठें, बल्कि आधा मिनट तक बिस्तर पर लेटे रहें।
​अगला आधा मिनट: लेटने के बाद धीरे से उठकर बिस्तर पर ही बैठ जाएं और आधा मिनट का विश्राम लें।
​अंतिम ढाई मिनट: बिस्तर के किनारे बैठकर अपने पैरों को नीचे की ओर लटकाए रखें।वही ​डॉक्टरों का मानना है कि इन साढ़े तीन मिनट की प्रक्रिया के बाद मस्तिष्क और हृदय में रक्त का संचार सामान्य हो जाता है। इसके बाद जब आप चलते हैं, तो अचानक बेहोश होने या दिल का दौरा पड़ने का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है।

इस समय ​स्वस्थ दिखने वाले लोग भी चपेट में ​अक्सर सुनने में आता है कि कोई व्यक्ति रात में बिल्कुल ठीक सोया था, लेकिन सुबह वह मृत पाया गया। चिकित्सा जगत इसे ‘पोस्चुरल हाइपोटेंशन’ (Postural Hypotension) से भी जोड़कर देखता है। जहाँ अचानक शरीर की स्थिति बदलने से ब्लड प्रेशर तेजी से गिरता है। 30 साल से ऊपर के युवाओं में बढ़ता तनाव और खान-पान भी इस खतरे को बढ़ा देता है।भीषण

जाने क्या है ​विशेषज्ञों की सलाह:

ध्यान रखना चाहिए कि ​रात को सोते समय सिर और कानों को ढक कर रखें।
​बिस्तर से उठते ही तुरंत ठंडे पानी के संपर्क में न आएं।
​कमरे के तापमान को संतुलित रखने का प्रयास करें।
​रात में भारी भोजन से बचें और पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं।

समय सावधानी और साझा करने का है। जो कि यह साढ़े तीन मिनट का छोटा सा अभ्यास आपके और आपके प्रियजनों के जीवन की रक्षा कर सकता है। इस कड़ाके की ठंड में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें ताकि अचानक होने वाली इन दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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