
नेवरा बुधवारी बाजार में जहां सब्जी कोचियो को बैठना चाहिए वहा बैठ रहे जानवर व बना चारपहीया पार्किंग
नेवरा बुधवारी बजार मे नगर प्रशासन की अंदेखी से होरहा ट्राफिक जाम
तिल्दा नेवरा रायपुर : छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के विकासखंड तिल्दा नेवरा एक अयसा नगर पालिका है जहां पर शहर के अतिप्राचिन हाट बजार नगर प्रशासन व नेताओं के कंट्रोल से बाहर नजर आता है। क्योंकि यहां जब भी बजार लगता है। तब तब यहां के रोड रास्ते भारी भीड के साथ जाम लगी रहती है। इससे आने जाने वालो को भारी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। जिसमे अनेक समस्या व अव्यवस्था देखी जा सकती है। जबकि तकरीबन 18 साल से यहां बाजार में समुचित व्यवस्था को बनाये रखने के लिए आप उचित चबुतरा व छायादार परिसर का निर्माण बनाया गया है। लेकिन इस व्यवस्था के ठीक विपरित बाजार लग रही है। जो जिम्मेदारो के नजर मे तो है। पर शायद किसी को कोई मतलब नहीं है। क्योंकि अब तक किसी ने यहां की समस्याओं व व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज नहीं उठाया है। या फिर सुना समझा नही गया हो।
जहां सब्जी कोचियो को होना चाहिये बैठे रहते हैं वहा जानवर और रखी जाती है चारपहिया :
नेवरा के बुधवारी बाजार में देखा जा सकता है कि पूर्व नगर पालिका प्रशासन के द्वारा यहां की जरूरतों और भारी भीड को देखते हुए। यहां बजार स्थल मे ही विशालकाय छायादार चबुतरा का निर्माण किया गया है। पर यहां बारिश के समय में भी छायादार बने चबुतरे मे सब्जी कोचिये न बैठकर रोड पर, नीचे रास्ते व गलियों पर बैठे नजर आते हैं। वही देखा जाता है कि जो स्थान सब्जी बेचने के लिए चबूतरे बने हैं। उस जगहो पर जानवरों, कुडा कचरो, व चारपहिया, दुपहिया वाहनों को रखा जाता है। जो कि यह नगर पालिका प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी, गैरजिम्मेदाराना को प्रगट करती हू। जबकी यह सबके लिए बडी समस्या व अव्यवस्था बनी हुई है।
ट्रैफिक जाम की भारी जोखिमभरा हालत निर्मित होता है :
बुधवारी बाजार स्थल पर वैसे तो सप्ताह में केवल दो दिन ही बाजार लगता है। पर इस दो दिनों मे यहां के रोड रास्तो में भारी जोखिमभरा जाम बना रहता है। जिसमे भारी वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। इसके साथ ही नगर के चारो तरफ से दुर दुर तक ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोगो का आवागमन बना रहता है। यहां इस खतरनाक, जोखिमभरा ट्रैफिक जाम भी यहा के इस बुधवारी बाजार की बैठक अव्यवस्था ही बडा भारी कारण है।
पार्कि की भारी समस्या क्योंकि सब्जी कोचियो का कब्जा है;
तिल्दा नेवरा के सुप्रसिद्ध बुधवारी बाजार मे अगली बडी समस्या चारपहिया, दुपहिया वाहनों की पार्किंग की बडी भारी समस्या बनी हुई है। यह इस लिए है कि जहां पर पार्किंग होनी चाहिए। वहां पर बाजार हाट में आये सभी प्रकार के गुमटी, ठेले, सब्जी बेजचने वालो के द्वारा दुकान लगाया जाता है। वो भी बीना किसी व्यवस्था बनाये। जिसको जहां, जब जैसे मन पडा वही पर दुकान लगा लिया जाता है। जबकी इसमे होना यह चाहिए कि जो चबुतरा है वहा पर दुकाने लगाने के लिए नगरपालिका प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को ध्यान देते हुए। सभी को निदेशित किया जाना चाहिए। वही खाली जगहो के लिए पार्किंग के लिए खाली रखवाना चाहिए। साथ ही पार्किंग की उचित व्यवस्था के लिए ठेका के माध्यम से पार्किंग टैक्स के साथ कतारबद्ध व व्यवस्थीत करवाने चाहिए।
शौचालय तो है बाजार स्थल पर भारी गंदगी, बंद व जर्जर अवस्था में :
बता दे कि तिल्दा-नेवरा के बुधवारी बाजार में शौचालय निर्माण तो है। पर उसका कोई रखरखाव व देखभाल नही किया जारहा। क्योंकि यहां के शौचालय में भारी गंदगी, पानी की कमी, जर्जर अवस्था में है। इस प्रकार समुचित सुविधाओं के साथ शौचालय न होने से खास कर महिलाओं व बच्चों को खासी परेशानी हो रही है। इन सबका कारण रखरखाव व जिम्मेदारो की अनदेखी व गैरजिम्मेदाराना नजर आता है।
पीने की पानी की समस्या बुधवारी बाजार में भी बडी समस्या है :
अवगत यह भी हो कि तिल्दा-नेवरा के बुधवारी बाजार में सबसे बडी समस्या यह भी है कि यहां पीने की पानी की कमी महसूस होती है। क्योंकि कही भी बाजार स्थल पर पेय जल दिखाई नही देता। इस लिए बाजार करने आये लोगो को होटलो का सहारा लेना पडता है। या फिर कही और से तो यह भी एक बडी समस्या नजर आती है।
नेवरा बुधवारी बाजार को लेकर सब्जी कोचीयो की बात यह है :
नेवरा बुधवारी बाजार के इस दशा व व्यवस्था पर कुछ सब्जी कोचियो का कहना है कि यदि हम चबुतरे मे छज्जे के निचे दुकान लगाते हैं तो हमारी सब्जी खराब भी अच्छी नजर आती है। जिसका कारण है पर्याप्त रौशनी की व्यवस्था न होना। चूंकि यहां कहने को तो लाईट लगा दिया गया है। पर व पर्याप्त नही है। यह भी बडा वजह सामने आया है। लेकिन जहां तक दिन का सवाल है, गर्मी के मौसम या सुखे के मौसम की बात है। तो यह समस्या लाजमी नहीं लगता। इसी को यदि अलग नजर से देखे तो कोचिये भी अपनी मन की करते नजर आरहे है। इस पर नगर प्रशासन को नियंत्रित करना चाहिए।
लाखो की लागत से बनी नेवरा बुधवारी बाजार गुमटी छावनी छतीगस्त व जर्जर :
यहां छावनी जो बनाई गई है। उसमे प्लास्टिक की पारदर्शी सीट लगाई गई है। जो अब सड कर, टुट कर छेद हो गया है। इसकी मरम्मत नही होने से भी कभी कुछ चीजो के गिरने की संभावना बनी हुई है। यह भी एक कारण निकल सामने आया है।
शराबीयो का अड्डा बना हुआ नेवरा बुधवारी बाजार परिसर :
नेवरा बुधवारी बाजार में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यहां बाजार परिसर पर सामाजिक तत्वो व शराबीयो का मजमा लगे होने की बात भी बताई गई है। जिसके कारण से चोरी,, पाकीट मारी जैसी शिकायत भी सामने आता रहा है। वही यहां कही भी शराबीयो के द्वारा खुलेआम शराब पीते भी देखा गया है। इस प्रकार से यहां सुरक्षा व्यवस्था पर भी भारी सवाल खडा होता है।
नेवरा बुधवारी बाजार के प्रति जिमेदारो को समुचित व्यवस्था एवं स्वच्छता पर ध्यान देना होगा
गौरतलब हो कि नेवरा के बुधवारी बाजार की समस्या किसी एक व्यक्ति या कुछ एक साल या फिर किसी पार्टी विशेष के द्वारा निर्मित नही है। अपितु इस अव्यवस्था, असुविधा, व अस्वच्छता के लिए सभी का कही न कही, किसी न किसी रूप में गैरजिम्मेदाराना, कर्तव्यहिनता के कारण से बना हुआ है। अत : इस समाचार के माध्यम से सबको मील जुलकर, यहा उत्पन्न सभी समस्याओं, अव्यवस्थाओं, गंदगीयो को दूर करने के लिए एकजुट होकर कमर कसना चाहिए। कब कौन था, किसने क्या, किया, क्या नही किया आदि सोच व भावनाओं को त्याग करे। और जितना जल्दी हो सके दुर करे। अयसा कर हमर तिल्दा-नेवरा को सुव्यवस्थित, स्वच्छ, सुंदर बनाये।





