
ब्रेकिंग : पांच घंटे तड़पने के बाद फर्श पर ही दी जन्म बच्चे को मां
सूरजपुर : छत्तीसगढ़ में जबतक मामला समाचारों की सुर्खियों में शामिल ना हो। तब तक जवाबदेह अफसरों की लापरवाही पर कोई सख्ती नहीं बरतने की पुरानी परंपरा ने सूरजपुर जिले में एक दफा फिर से मानवीय संवेदना को शर्मशार करने के साथ ही। शासकीय स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल कर रख दी है।
बता दे कि बीते दिनों भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना को लेकर जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी। जिसमे हास्पिटल पहुंचने के बाद भी एक गर्भवती मां को असहनीय दर्द में ठंडे फर्श पर अपने नवजात को जन्म देना पड़ा। क्योंकि हास्पिटल में न डॉक्टर मौजूद था। न ही कोई नर्स। वह बेचारी प्रसव पीड़ा को सहन करते पांच घंटे तक तड़पती रही। मगर मदद के नाम पर सिर्फ सन्नाटा बताया गया है ।
इस मामले में जब घटना के बाद पहुंचे डॉक्टर ने औपचारिकता निभाते हुए। मां-बच्चे को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। यह लापरवाही न केवल स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी उजागर करती है। बल्कि ग्रामीण भारत में मातृत्व की पीड़ा को और गहरा करती है।
जाने क्या कहां स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा वादा करते हुए :
गौरतलब हो कि मामला तूल पकड़ने पर कुछ समाचार संस्थानों से चर्चा में इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं। वादा किया है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन क्या यह आश्वासन उस मां की पीड़ा कम कर पाएगा…? क्या यह ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को सुधारेगा…? जांच कमेटी गठित तो हुई। मगर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम कब उठेंगे। 
अवगत हो कि यह सिर्फ एक मां की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों ग्रामीण महिलाओं की त्रासदी है। जो संसाधनों और संवेदना के अभाव में हर दिन ऐसी अमानवीय स्थिति झेलने को मजबूर हैं। यह घटना हमें झकझोरती है। आखिर कब तक एक मां को फर्श पर तड़पकर अपने बच्चे को जन्म देना पड़ेगा।





