
छत्तीसगढ़ : तिरंगे का अपमान टेलीफोन के खंबे में ही फहरा दिया तिरंगा
डोंगरगांव :
छत्तीसगढ़ के डोगरगांव नगर मे इस स्वतंत्रता दिवस पर केंद्रीय कर्मचारियों के दायरे में आने वाले सरकारी कर्मचारी जो कि यहां के उपडाकघर परिसर में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण तो किया। लेकिन तिरंगे को सीधा टेलीफोन के पुराने खंबे पर ही फहराकर दिया गया। जो कि खुलेआम तिरंगे का अपमान किया जाना माना गया। जब इस घटना की जानकारी लगने के बाद शहर के मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे। तब स्थानीय प्रशासन व पुलिस को सूचित किया गया। जिसके बाद ही मामले की गंभीरता देखते हुए। प्रशासन की ओर से तहसीलदार पी.एल.नाग व पुलिस जवान पहुंचे। जिसके बाद तिरंगे को ससम्मान उतारा गया।
बता दे कि यहां के पोष्ट ऑफिस के अधिकारियों के द्वारा इस तरह की बडी लापरवाही कीये जाने पर यहा के नाराज मीडियाकर्मियों ने प्रशासन से कड़ी कार्यवाही मांग कीये। किन्तु अब तक इस मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस के पास 30 घंटे बीतने के बाद भी कोई कार्यवाही की सूचना नहीं है। जिससे यह बडी प्रशासनिक सुस्ती साफ झलक रही है।
गौरतलब हो कि स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण को लेकर पूरे देशवासियों में काफी उत्साह रहता है। जिसमे स्कूल कालेज से लेकर शासकीय, अर्धशासकीय और प्राईवेट संस्थानों से लेकर आमजनों के घरों में भी झंडारोहण किया जाता है। देश के सम्मान का प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए विशेष रूप से भारतीय ध्वजा संहिता को 26 जनवरी 2002 में संशोधन के बाद लागू किया गया है। जिसमें अब तिरंगा को सम्मानजनक स्थिति में किसी भी दिन और रात्रि में भी फहराया जा सकता है। वही इस संहिता में बताया गया है। कि तिरंगा कटाफटा या मैला न हो और खुले स्थल पर फहराया जाना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान प्रत्येक नागरिक के लिए सम्मान का विषय है। लेकिन डोगरगांव नगर में पोष्ट ऑफिस कार्यालय में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी ध्वजारोहण को मजाक बनाकर रख दिया और मनमाने ढंग से कार्यालय के सामने लगे टेलीफोन के खंबे में ही ध्वजारोहण कर दिया।
ज्ञात हो कि जहाँ पूरे देश भर में जहां जोरशोर से स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराया जा रहा था। और सभी देशवासियों में 79वें आजादी के पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा था। वहीं दूसरी ओर डोंगरगांव उपडाकघर जो केन्द्र सरकार का महत्वपूर्ण कार्यालय है। और इस कार्यालय से आम से लेकर खास व्यक्ति का जुड़ाव है। ऐसे कार्यालय में ध्वजा संहिता का भी ध्यान ही नहीं रखा गया।वहीं मामले की गंभीरता देखते हुए । स्थानीय प्रशासन को स्वयं कड़ी कार्यवाही कर एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। किन्तु यहा घटना को कई घंटे बीतने के बाद भी कोई कार्यवाही की जानकारी नहीं है। जबकि स्थानीय मीडिया की टीम ने पोष्ट आफिस कर्मचारियों के खिलाफ थाने रिपोर्ट भी कर दिया गया है।





