
ब्रेकिंग : देश में लागू होने जा रहे 4 नए श्रम कानून:
जानिए क्या बदलेगा मजदूरों और नियोक्ताओं के लिए, क्या होगा लाभ हानि
नई दिल्ली : मोदी के केंद्र सरकार द्वारा श्रम सुधारों के तहत देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए श्रम संहिता (Labour Codes) बनाए गए हैं। इन नए कानूनों का उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना, औद्योगिक संबंधों को सरल बनाना और नियोक्ताओं के लिए नियमों को एकरूप बनाना बताया गया है। हालांकि, श्रमिक संगठनों का मानना है कि इन कानूनों से मजदूरों के अधिकार कमजोर हो सकते हैं।
आइए जानते हैं इन 4 नए श्रम कानूनों के बारे में विस्तार से
1.मजदूरी संहिता, 2019
(Code on Wages)
यह संहिता देश में मजदूरी से जुड़े सभी कानूनों को एक मंच पर लाती है।
प्रमुख प्रावधान:
न्यूनतम मजदूरी अब केंद्र सरकार द्वारा तय राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन से कम नहीं होगी
समान कार्य के लिए समान वेतन का प्रावधान
समय पर वेतन भुगतान अनिवार्य
असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी दायरे में
प्रभाव:
इस कानून से मजदूरों को न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी मिलेगी, लेकिन राज्य सरकारों की भूमिका सीमित हो सकती है।
2.औद्योगिक संबंध संहिता,
2020 (Industrial Relations Code)
यह कानून औद्योगिक विवाद, ट्रेड यूनियन और हड़ताल से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है।
प्रमुख प्रावधान:
300 तक श्रमिकों वाले संस्थानों को छंटनी/बंद करने में सरकार की अनुमति जरूरी नहीं
हड़ताल से पहले 60 दिन की नोटिस अवधि अनिवार्य
ट्रेड यूनियन की मान्यता के लिए तय शर्तें।
नये श्रम कानून विवादो के घेरे में :
मजदूर संगठनों का कहना है कि इससे हड़ताल का अधिकार कमजोर होगा और छंटनी आसान हो जाएगी।
3.सामाजिक सुरक्षा संहिता,
2020 (Code on Social Security)
इस संहिता का उद्देश्य सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
प्रमुख प्रावधान:
PF, ESI, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ शामिल
गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर (जैसे Ola, Zomato) को पहली बार मान्यता
असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस
खास बात:
यह कानून भविष्य में करोड़ों असंगठित श्रमिकों को पेंशन और बीमा से जोड़ सकता है।
व्यावसायिक सुरक्षा :
स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020
(Occupational Safety, Health and Working Conditions Code)
यह कानून कार्यस्थल की सुरक्षा और काम करने की परिस्थितियों से जुड़ा है।
ये है प्रमुख प्रावधान:
काम के घंटे: अधिकतम 8 घंटे प्रतिदिन, ओवरटाइम का प्रावधान
महिलाओं को रात्रि पाली में काम की अनुमति (सुरक्षा शर्तों के साथ)
ठेकेदार और प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष नियम
उद्योगपतियों एवं श्रमिकों पर प्रभाव:
:
काम की परिस्थितियों में सुधार संभव, लेकिन निरीक्षण व्यवस्था कमजोर होने की आशंका।
नये श्रमिक कानून लागू करने का उद्देश्य :
जानकारी के अनुसार चारों श्रम कानूनों का उद्देश्य “एक देश–एक श्रम कानून व्यवस्था” बनाना है। सरकार इन्हें निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल मानती है, जबकि श्रमिक संगठनों का कहना है कि ये कानून मजदूर विरोधी हैं और इनके खिलाफ लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि ये कानून जमीन पर लागू होने के बाद श्रमिकों के जीवन को कितना सुरक्षित और सम्मानजनक बनाते हैं।





