
ब्रेकिंग : 12 मई को “राष्ट्रीय मांग दिवस” मनाने का आह्वान, श्रमिक संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की
नई दिल्ली/तिल्दा नेवरा : केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों एवं विभिन्न एसोसिएशनों के संयुक्त मंच ने 12 मई 2026 को पूरे देश में “राष्ट्रीय मांग दिवस” के रूप में मनाने का आह्वान किया है। संगठनों ने श्रमिक अधिकारों, न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा और श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की है।

वही संयुक्त ट्रैडयूनियन के द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में हड़ताली श्रमिकों पर कार्रवाई, यूनियन नेताओं पर मुकदमे तथा संविदा श्रमिकों के बढ़ते शोषण जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। संगठनों ने आरोप लगाया कि श्रमिकों के अधिकारों पर कॉर्पोरेट हितों के दबाव में हमला किया जा रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गौरतलब हो कि संयुक्त मंच ने कहा कि महिलाओं के साथ कार्यस्थलों पर असुरक्षा और उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं, वहीं संविदा श्रमिकों को कम वेतन, लंबा कार्य समय और स्थायित्व का अभाव झेलना पड़ रहा है। इसी के विरोध में देशभर में विरोध प्रदर्शन, धरना, जुलूस, सभाएं और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
संगठनों की प्रमुख मांगों में गिरफ्तार श्रमिकों और कार्यकर्ताओं की रिहाई, श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेना, न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह तय करना, 8 घंटे कार्य दिवस लागू करना, समान काम के लिए समान वेतन तथा एलपीजी एवं आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण शामिल हैं।
अवगत हो कि मिली जानकारी के अनुसार संयुक्त मंच ने औद्योगिक इकाइयों, कारखानों, कार्यालयों, गांवों और शहरों में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने तथा अधिक से अधिक श्रमिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। बयान में कहा गया कि “एकजुट श्रमिक ही मजबूत देश की नींव हैं” और संगठित संघर्ष से ही श्रमिक हितों की रक्षा संभव है।





