
मजदूर विरोधी नये 4 श्रम कानून को मोदी सरकार वापस ले नही तो होगी भारी आक्रोश प्रदर्शन : चेतेंद्र वर्मा श्रमिक नेता
बलौदाबाजार, 26 नवंबर 2025 : हाल ही मे भारत सरकार के द्वारा पुराने श्रम कानूनों मे बदलाव कर नये 4 श्रम कानून लागू कर दिया गया है। जिसका पहले से ही अखिल भारतीय श्रमिक संघ के द्वारा संयुक्त रूप से विरोध दर्ज किया गया था। इसी परिपेक्ष्य में मजदूर विरोधी चार श्रम कोड बिल वापस लिया जाय। यह मांग बलौदाबाजार क्षेत्र के इंटक नेता चेतेंद्र वर्मा ने किया है।
चेतेंद्र वर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 21 नवंबर 2025 को देश मे चार श्रम कोड लागु हो गये है। ये कानून मेहनत कस मजदूरों के लिए अत्यंत घातक साबित होगा। मजदूरों को एक बार फिर गुलामी की स्थिति मे जिने को मजबूर कर देंगे। इस दौरान क्रमशः इस प्रकार से है। मसलन:
1)पहली बात तो ये है की स्थाई या परमानेंट मजदूर नही होगे सभी फिक्स टर्म कांटेक्ट पर रहेंगे
2)दूसरी बात पुरे देश मे फ्लोर वेज तय होगा जिससे निचे न्यून्तम वेतन नही सकता है हम 26,000 महीने का जिने लायक वेतन मांग कर रहे है पूरे देश मे
3)ट्रेड यूनियन बनाना और रजिस्ट्रेशन कराना और कठिन हो जायेगा ,और बिना संघटन मजदूरों का अधिकार नही मिलेगा शोषण बढ़ जायेगा।
4)कहा गया है की ओवर टाइम का भुगतान डबल मिलेगा ,लेकिन कार्य का समय 12 घंटा कर दिया गया है
ये सभी नियम ठेका प्रथा मजदूरों पर डर और शोषण का औजार बनाना – स्थाई रोजगार ख़त्म करना मजदूरों को गुलाम बनाना। 300 तक कर्मचारीयों वाले इकाईयो मे छटनी-बन्दि बिना सरकारी अनुमति – मतलब नौकरी को सुरछा नही
यूनियन की ताकत तोड़ना ताकी मजदूरों को गुलाम बनाया जा सके यूनियन मान्यता के लिए 51% सदस्यता जरूरी कर दिया गया है जो यूनियन को ख़त्म करना और मजदूरों का शोषण को बढ़ावा मिलेगा।
लेवर कोड कानून लाया गया है वो उद्योगपतियों के पछ मे है
इसे वापस लेने की मांग करते है।
चेतेन्द्र (चिनु)वर्मा, जिला अध्यक्ष
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस ट्रेड (इंटक) छ.ग.।






