
अल्दा ईंट भट्टे मे पुलिस का औचक छापा पर कही ये अन्याय के खिलाफ आवाज दबाने का प्रयास तो नही?
तिल्दा नेवरा /रायपुर : छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के क्षेत्र विकासखंड तिल्दा नेवरा के समीपस्थ औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत पहली बार किसी ईटा भट्टे पर कार्यवाही होने पर बाकायदा पुलिस थाना तिल्दा नेवरा के द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कीया गया है। जो कि यह अपने आप में कई सवाल खड़े करते हैं। लेकिन अब क्या पुलिस विभाग अब तिल्दा नेवरा के सभी ईट भट्टों पर अयशी ही दलबल के साथ कार्यवाही करेगा ?
बता दे कि तिल्दा-नेवरा तहसील क्षेत्र में पुलिस प्रशासन के द्वारा किया गया ईंट भट्टों पर प्रशासनिक कार्रवाई। यहां के समय व परिस्थिति के अनुसार अब बडी सवालों के घेरे में आ गई है। वही इस कार्यवाही के चलते यहां के क्षेत्रवासियों ने प्रशासन की इस कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए। इसे पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई जैसी आंतरिक सुगबुगाहट सुनने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार अचानक इस बडी कार्रवाई से ग्राम अल्दा के ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में वर्षों से बड़े पैमाने पर अनेक ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। लेकिन उन पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकी दूसरी ओर ग्राम अल्दा निवासी लखन लाल वर्मा के ही ईंट भट्टे पर ही, जो छोटे स्तर पर ईंट भट्टा संचालित कर, अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उन पर अचानक प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरा दी गई है ।
बता दे कि छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर के क्षेत्र विकासखंड तिल्दा नेवरा के मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम अल्दा के लखन वर्मा जीविकोपार्जन के लिए छोटा ईंट भट्टा चला रहे थे। यहां ग्रामीणों का आरोप है कि इसी तहसील मुख्यालय के आस पास हर गांव में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। जहां उनको ईंट भट्टों को प्रशासन की खुली छूट मिली हुई है। लेकिन दूरस्थ गांव के एक छोटे संचालक को निशाना बनाना कई सवाल खड़े करता है। इस पर ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्रवाई को ग्राम अल्दा में प्रस्तावित बालाजी स्पंज उद्योग के विरोध आंदोलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
ज्ञात हो कि इस पर ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित उद्योग के खिलाफ लंबे समय से विरोध जारी है। जिसमे लखन वर्मा को इस आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं में माना जाता है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रशासनिक कार्रवाई आंदोलन को दबाने और विरोध की आवाज को कुचलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस पर
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की मंशा से एक व्यक्ति विशेष को टारगेट किया गया है।
उनका सवाल है कि जब तहसील मुख्यालय के “नाक के नीचे” बड़े-बड़े ईंट भट्टे खुलेआम संचालित हो रहे हैं। तब केवल एक छोटे ईट भट्टा पर कार्रवाई क्यों? इस पूरे मामले ने प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
क्या अन्याय व अपने हक के लिए विरोध जताना। ग्रामीणों की हितों का ध्यान रखना जिसे जनप्रतिनिधि को करना चाहिए गुनाह है। यदि यही होता रहा। तो ओ दिन दुर नही है कि यह क्षेत्र अधेप नगरी चौपट राजा, टके शेर भांजी टके शेर खाजा वाली कहावत सही होगा।





