
छग हाईकोर्ट का अहम फैसला महिला अतिथि व्याख्याता को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश का पूरा लाभ
बिलासपुर (जयराम धीवर की रिपोर्ट) : छत्तीसगढ़ के महिला अतिथि व्याख्याताओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि अतिथि व्याख्याता भी मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत मातृत्व अवकाश के दौरान पूर्ण आर्थिक लाभ पाने की हकदार हैं। केवल “अतिथि व्याख्याता” होने के आधार पर किसी महिला कर्मचारी को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

ज्ञात हो कि यह मामला दुर्ग जिले के खुर्सीपार स्थित शासकीय मोहनलाल जैन महाविद्यालय में कार्यरत अतिथि व्याख्याता डॉ. अंजली जोशी से जुड़ा है। मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन नहीं मिलने पर उन्होंने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मातृत्व अवकाश के दौरान आर्थिक लाभ प्रदान करना नियोक्ता की वैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला कर्मचारियों के सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और कार्यस्थल पर समानता की रक्षा करना आवश्यक है। न्यायालय ने माना कि मातृत्व केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि महिला गरिमा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील अधिकार है।
हालांकि अदालत ने यह राहत फिलहाल केवल वर्तमान याचिका तक सीमित रखी है। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने अधिकारों के प्रति सजग रहते हुए कानूनी लड़ाई लड़ी, इसलिए उन्हें यह लाभ दिया जाना उचित है।जानकारी के अनुसार, डॉ. अंजली जोशी ने गर्भावस्था के दौरान नियमानुसार छह माह का मातृत्व अवकाश लिया था। लेकिन महाविद्यालय प्रबंधन ने 20 जून 2024 के एक परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि अतिथि व्याख्याता केवल अवकाश लेने की पात्र हैं, आर्थिक लाभ की नहीं। इसी आधार पर अवकाश अवधि का वेतन रोक दिया गया था।
डॉ. जोशी ने बताया कि प्रसव के दौरान उन्हें गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन और उच्च शिक्षा विभाग से कई बार पत्राचार कर न्याय की मांग की, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता शुभम तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
मामले में सुनवाई के दौरान महिला सम्मान, मातृत्व गरिमा और समान अधिकारों के पक्ष में विस्तृत दलीलें पेश की गईं। अंततः हाईकोर्ट ने 11 मई 2026 को अपना आदेश जारी करते हुए डॉ. अंजली जोशी को राहत प्रदान की।





