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ब्रेकिंग : असम में कैबिनेट मंत्री बने छत्तीसगढ़ के बालोद के रामेश्वर तेली बंधुआ मजदूर बन गये थे

140 साल पहले पूर्वज गये थे बंधुआ मजदूर बन चाय के बागान मे काम करने रहे हे मोदी के साथ सांसद भवन मे भी

रायपुर(जयराम धीवर की रिपोर्ट) : असम में मंगलवार को हिमंत बिस्वा सरमा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बडी व खास बात है कि उनके साथ शपथ लेने वाले मंत्री रामेश्वर तेली छत्तीसगढ़ मूल के हैं। बालोद जिले के घुमका गांव से 140 साल पहले उनके पूर्वज चाय बागान में मजदूरी करने गए थे। असम में लगभग 15 लाख से ज्यादा छत्तीसगढ़िया चाय बागानों में काम कर रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ से 140 साल पहले बंधुआ मजदूर के रूप में ले जाए गए थे। वे असम में चाय उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं ओर वहां की संस्कृति में रच-बस जाने के बावजूद अपनी पारंपरिक भाषा, सुआ नाचा और सांस्कृतिक पहचान को आज भी जीवित रखे हुए हैं।असम

बता दे कि भाजपा नेता रामेश्वर तेली ने दुलियाजन विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है। वे कांग्रेस के ध्रुबा गोगोई को हराकर विधानसभा पहुंचे हैं। इससे पहले वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में रामेश्वर तेली डिब्रूगढ़ सीट से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पूर्व सीएम सर्वानंद सोनवाल के लिए यह सीट छोड़ दी थी। वे अभी भी दुलियाजान के टिपलिंग पुराना घाट इलाके में बांस और टिन के बने घर में अपनी मां के साथ रहते हैं। साल 2011 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद रामेश्वर तेली आजीविका के लिए मुर्गी पालन के काम में लग गए थे। कई बार खेत में सामान ढोने के लिए ठेले को रामेश्वर तेली खुद खींचते दिख जाते हैं।असम

बडी बात है कि रामेश्वर तेली आल असम टी ट्राइब स्टूडेंट्स यूनियन में बतौर छात्र नेता काम करते हुए अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की। 12 जुलाई 1999 को तेली भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। असम की रजनीति में यह वह दौर था जब क्षेत्रीय पार्टी असम गण परिषद के शासन के बाद कांग्रेस बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उस समय प्रदेश में बीजेपी काफी कमजोर पार्टी मानी जाती थी।

ज्ञात हो कि रामेश्वर तेली मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं। उन्हें चाय बागान वाले इलाकों और अन्य पिछड़ा वर्ग समुदायों में प्रभावशाली नेता माना जाता है। रामेश्वर तेली के पिता बुद्धु तेली डायव्हर का काम करते थे और मां दुक्ला तेली चाय बागान में मजदूर का काम करती थी। बचपन में रामेश्वर तेली अपने छोटे भाई भुवनेश्वर तेली के साथ चाय की गुमटी के सामने पान-सुपारी का डाला लगाया करते थे। कई दफे उन्होंने रास्ते के किनारे सब्जियां बेचने का काम भी किया है।असम

अवगत हो कि 9 नंवबर 2022 को वे पहली बार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री की हैसियत से पहुंचे थे। तब मीडिया से छत्तीसगढ़ी भाषा में बातचीत कर रामेश्वर तेली ने सबको हैरान कर दिया था। रामेश्वर तेली का ननिहाल धमतरी है। रामेश्वर तेली अविवाहित हैं।

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