
घरघोड़ा में नियमों की उड़ती धज्जियां: कृषि भूमि पर फ्लाई ऐश डंपिंग, मंत्री के दावों पर उठे सवाल
नावापारा-टेड़ा में एनजीटी नियमों का उल्लंघन, किसानों की जमीन पर जहरीली राख—राजस्व अमले की भूमिका भी संदिग्ध
रायगढ़/घरघोड़ा: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत नावापारा-टेड़ा क्षेत्र में फ्लाई ऐश के अवैध निपटान का मामला सामने आया है। यहां खुलेआम कृषि भूमि पर राख डंप किए जाने से न सिर्फ पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि गरीब किसानों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिस भूमि पर किसानों को खेती के लिए शासन द्वारा आवंटन किया गया था, उसी जमीन पर अब उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश डाली जा रही है। जहां धान की फसल लहलहानी चाहिए थी, वहां अब जहरीली राख के ढेर नजर आ रहे हैं।
मंत्री के दावों पर सवाल :
हाल ही में विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने फ्लाई ऐश निपटान को लेकर सख्त नियमों और मॉडल एसओपी लागू करने की बात कही थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वन एवं कृषि भूमि पर राख डालना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद घरघोड़ा क्षेत्र की स्थिति उनके दावों के विपरीत नजर आ रही है।
राजस्व अमले की कार्यप्रणाली संदिग्ध
मामले में स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
नायब तहसीलदार का कहना है कि खसरा नंबर 311/4 पर पर्यावरण स्वीकृति के बाद कार्य किया जा रहा है।
वहीं पटवारी लोकेश पैकरा ने स्वीकार किया कि भूमि कृषि योग्य है और आसपास खेती भी हो रही है, लेकिन जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख करने का कोई कॉलम नहीं था।ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या नियमों का पालन केवल कागजी कॉलम तक सीमित रह गया है? क्या जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करना अब सिस्टम का हिस्सा बन गया है?
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा :
अवगत हो कि विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लाई ऐश का अनियंत्रित निपटान मिट्टी की उर्वरता को खत्म कर सकता है और हवा में घुलकर लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। ग्रामीणों के मुताबिक, राख के कारण सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं और खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
कार्रवाई का इंतजार :
इस मामले में अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या मंत्री के निर्देशों का पालन होगा या फिर रसूखदारों की मिलीभगत से नियमों की अनदेखी जारी रहेगी। यह आने वाला समय तय करेगा।





